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मिर्ज़ा ग़ालिब (दिल के पन्ने ) Mirza Galib (Dil ke Panne)

dil ke panne Tuesday, 18 April 2017 0

ये न थी हमारी क़िस्मत कि विसाल-ए-यार होता अगर और जीते रहते यही इंतज़ार होता। तेरे वादे पर जिए हम तो ये जान झूठ जाना कि खुशी से मर ...