मैं ने कब चाहा कि मैं उस की तमन्ना हो जाऊँ ये भी क्या कम है अगर उस को गवारा हो जाऊँ मुझ को ऊँचाई से गिरना भी है मंज़ूर, अगर उस...
अब्दुल अहद ‘साज़’( दिल के पन्ने) Abdul Ahad Saaz (Dil ke Panne)
dil ke panne Thursday, 11 May 2017
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